बाल संरक्षण और अधिकार के लिए भारतीय संविधान के प्रवक्ता - एडवोकेट बलवंत भाटिया

महात्मा गांधी राज्य संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला
मानसा,, 29 सितंबर (संतोख सिंह सागर) - भारत का संविधान बच्चों के संरक्षण और अधिकारों के लिए कई प्रावधानों का प्रतीक है, जिसका उपयोग बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण और उनके बहुमुखी विकास के लिए किया जाना चाहिए।
अधिवक्ता भाटिया ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 21ए, 24, 39ए, 39ई, 39(1)एफ और अनुच्छेद 45 का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों के लिए समानता, मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा, बाल श्रम की रोकथाम, आर्थिक जरूरतें, पहल मुफ्त कानूनी सहायता और प्रारंभिक बचपन की शिक्षा और रखरखाव भारतीय संविधान की सुंदरता के लिए एक वसीयतनामा है।
उन्होंने जिला एवं सत्र न्यायाधीश मैडम नवजोत कौर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मानसा सचिव श्रीमती शिल्पा के नेतृत्व में बच्चों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।
कार्यशाला में शामिल पुलिस अधिकारियों, बाल विकास अधिकारियों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और सामाजिक सुरक्षा कर्मियों को संबोधित करते हुए अधिवक्ता भाटिया ने कहा कि इन जगहों पर काम करना अपने आप में एक गौरवशाली कार्य है और हम सभी को बाल अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर काम करना चाहिए और हर संभव प्रयास करना चाहिए. बच्चों की रक्षा के लिए।
इस अवसर पर कार्यशाला के प्रशिक्षण अधिकारी मनदीप सिंह, बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. अजय तायल ने कार्यशाला में शामिल कर्मचारियों को प्रेरित करने की विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की और अतिथियों का धन्यवाद किया। इस मौके पर अधिवक्ता मंजू बाला व डॉ. लक्ष्मी नारायण भीखी उपस्थित थे।
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